बुनियादी ढांचे व सुरक्षा से निराश रेलवे यात्री सेवा समिति

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बुनियादी ढांचे व सुरक्षा से निराश रेलवे यात्री सेवा समिति

रेल मंत्रालय की यात्री सेवा समिति ने स्टेशनों के साथ-साथ रेलवे रेस्ट हाउसों की हालत पर असंतोष जताया है। समिति के 16 सदस्यों ने देश भर में 35 स्टेशनों का निरीक्षण किया।

नई दिल्ली (संजय सिंह)। रेल मंत्रालय की यात्री सेवा समिति के सदस्यों ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में स्टेशनों के साथ-साथ रेलवे रेस्ट हाउसों की दुर्दशा पर रेल मंत्रालय का ध्यान आकृष्ट किया है। समिति के अध्यक्ष पूर्व सांसद लाल बिहारी तिवारी ने पिछले दिनों रेलमंत्री सुरेश प्रभु को सौंपी अपनी दो तिमाही रिपोर्टो (मार्च-मई तथा जून-अगस्त, 2016) में कहा है कि समिति के 16 सदस्यों (अध्यक्ष समेत) ने देश भर में 35 स्टेशनों का निरीक्षण किया। कुछ स्टेशनों पर अच्छा काम दिखाई दिया, लेकिन ज्यादातर स्टेशन दुर्दशाग्रस्त दिखाई दिए।

यहां बुनियादी ढांचे से लेकर साफ-सफाई, पेयजल, स्टाल व सुरक्षा की स्थिति असंतोषजनक पाई गई। लेकिन सबसे ज्यादा खेदजनक स्थिति रेलवे आफीसर्स रेस्ट हाउसों की पाई गई जहां साफ-सफाई से लेकर खानपान तक कुछ भी ढंग का नहीं है। इसलिए समिति ने भविष्य में अपने सदस्यों के ठहरने के लिए पेमेंट बेसिस पर निजी होटलों का इंतजाम करने का अनुरोध किया है।

छह माह में समिति ने नई व पुरानी दिल्ली, आनंद विहार, सराय रोहिल्ला, शकूर बस्ती, किशनगंज, सब्जी मंडी, लखनऊ, प्रतापगढ़, जम्मू, कटरा, ऊधमपुर, बनिहाल, बड़गाम, अनंतनाग, मुगलसराय, वाराणसी सिटी, मंडुवाडीह, वाराणसी कैंट, मुंबई, अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत जैसे स्टेशनों का निरीक्षण किया। इस दौरान समिति की छह बैठकें हुई जिनमें रेलवे बोर्ड के मझोले स्तर के अधिकारियों ने शिरकत की।

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इन अधिकारियों ने सुझावों पर कार्रवाई का आश्र्वासन तो दिया, लेकिन किया कुछ नहीं। क्योंकि यह इनके बस में ही नहीं था। ज्यादातर कदम वरिष्ठ अफसरों की मंजूरी के इंतजार लंबित हैं। नतीजतन समिति को एक्शन टेकेन रिपोर्ट के बगैर ही अपनी रिपोर्ट सौंपनी पड़ी है।

कुछ स्टेशनों के बारे में प्रचार और वास्तविक स्थिति में फर्क देखकर समिति के सदस्यों को आश्र्वर्य हुआ। उदाहरण के लिए कटरा रेलवे स्टेशन को ही लें। इस स्टेशन का उद्घाटन दो साल पहले स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। लेकिन अभी तक यहां पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। प्लेटफार्मो पर शौचालय भी नहीं बनाए गए हैं। समिति को एक निशुल्क शौचालय मिला, लेकिन उसमें से दुर्गध आ रही थी। उच्च श्रेणी प्रतीक्षालय का एसी भी काम नहीं कर रहा था।

दीवारों पर जगह-जगह सीलन तथा प्लेटफार्मो पर पेंट के छींटे दिखाई दिए। सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्र में होने के बावजूद यहां सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था नहीं की गई है। वैसे सीसीटीवी कैमरों के काम न करने या उनका मुंह गलत दिशा में होने की समस्या आम पाई गई। इसी तरह जनता खाना मात्र कागजों तक सीमित है। मिलता कहीं नहीं।

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